चांद की फुसफुसाहट: 100 दिल को छू लेने वाली लघु कहानियों का संग्रह

 चाँद की भूली हुई बेटी


विलोमियर नाम का एक छोटा-सा गाँव था। चारों ओर हरे-भरे खेत, दूर तक फैले जंगल, छोटी-सी नदी और मिट्टी के बने घर। गाँव के लोग बहुत साधारण थे, लेकिन उनके दिल बहुत बड़े थे। हर शाम जैसे ही सूरज ढलता, पूरा गाँव अपने काम छोड़कर आसमान की ओर देखने लगता। जैसे ही चाँद निकलता, बच्चों की हँसी गूँज उठती, बूढ़े लोग हाथ जोड़कर उसे प्रणाम करते और औरतें अपने आँगन में दीपक जलाकर उसके स्वागत में गीत गातीं।

गाँव के लोगों का विश्वास था कि चाँद केवल रोशनी नहीं देता, बल्कि हर रात अपने साथ उम्मीद भी लेकर आता है।

उसी गाँव में एलारा नाम की एक लड़की रहती थी।

वह न किसी राजा की बेटी थी, न किसी अमीर परिवार से उसका कोई रिश्ता था। उसकी दुनिया बस एक छोटी-सी झोपड़ी थी, जहाँ वह अपनी दादी मारा के साथ रहती थी। लोग मारा को उसकी दादी ही मानते थे और एलारा भी उन्हें अपनी दुनिया का सबसे बड़ा सहारा समझती थी।

सुबह होते ही दोनों जंगल चली जातीं। वहाँ से औषधीय जड़ी-बूटियाँ, जंगली फूल और फल इकट्ठा करतीं। फिर बाज़ार में बेचकर जितने पैसे मिलते, उसी से उनका घर चलता।

गरीबी थी, लेकिन शिकायत नहीं थी।

मारा हमेशा कहा करती थीं, "जिसके पास दया है, उसके पास दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है।"

एलारा ने यही सीख अपने जीवन में उतार ली थी।

यदि किसी का घड़ा टूट जाता, तो वह नया घड़ा लाने तक अपना घड़ा दे देती। किसी बच्चे के पास खाना न होता, तो अपना हिस्सा उसे खिला देती। घायल चिड़िया दिखती तो उसे घर ले आती। गाँव के लोग कहते थे कि एलारा का दिल चाँद की रोशनी जितना कोमल है।

लेकिन एक बात हमेशा उसे परेशान करती थी।

हर पूर्णिमा की रात उसे एक ही सपना आता।

वह खुद को किसी अजीब दुनिया में देखती। चारों तरफ़ चाँदी जैसे चमकते पेड़, आसमान में तैरते महल, रोशनी से बनी नदियाँ और उनके बीच सफेद वस्त्र पहने एक सुंदर स्त्री।

उस स्त्री की आँखों में इतना अपनापन होता कि एलारा का दिल भर आता।

वह हमेशा अपनी बाँहें फैलाकर कहती,

"मेरी बेटी..."

इतना सुनते ही सपना टूट जाता।

एलारा कई बार मारा से इस सपने के बारे में पूछती, लेकिन मारा हर बार मुस्कुरा कर बात बदल देतीं।

एक रात सब कुछ बदल गया।

उस दिन शाम तो हुई, लेकिन चाँद नहीं निकला।

पहले लोगों ने सोचा कि बादल होंगे।

फिर उन्होंने इंतज़ार किया।

घंटे बीत गए।

आसमान पूरी तरह काला था।

एक भी तारा दिखाई नहीं दे रहा था।

गाँव में अजीब-सी ठंड फैलने लगी। खेतों में खड़ी फसल झुक गई। नदी का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। पेड़ों की पत्तियाँ मुरझाने लगीं। जानवर बेचैन होकर इधर-उधर भागने लगे।

लोग डर गए।

"यह कैसा अपशकुन है?"

"क्या चाँद हमसे नाराज़ हो गया?"

"क्या दुनिया खत्म होने वाली है?"

मारा की आँखों में चिंता साफ दिखाई दे रही थी।

उन्होंने धीमे स्वर में कहा,

"जिस दिन से मैं डर रही थी... वह दिन आ गया।"

एलारा ने घबराकर पूछा,

"आप क्या जानती हैं?"

लेकिन तभी पूरे गाँव के बीचोंबीच चाँदी जैसी एक तेज़ रोशनी उतरने लगी।

सबकी आँखें उस ओर टिक गईं।

रोशनी के बीच से एक विशाल सफेद हिरण बाहर आया।

उसके सींग चमकते हुए क्रिस्टल जैसे थे। उसकी आँखें तारों की तरह दमक रही थीं।

पूरा गाँव स्तब्ध रह गया।

हिरण धीरे-धीरे चलता हुआ सीधे एलारा के सामने आकर रुक गया।

उसने अपना सिर झुकाया और बोला,

"चंद्रलोक की राजकुमारी... आपके लौटने का समय आ गया है।"

पूरा गाँव सन्न रह गया।

एलारा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

"तुमने किसी और को समझ लिया है। मैं तो एक साधारण लड़की हूँ।"

हिरण मुस्कुराया।

"साधारण? नहीं। तुम वही हो जिसे इस दुनिया से छिपाकर रखा गया था।"

एलारा ने अविश्वास से मारा की ओर देखा।

मारा की आँखों से आँसू बह रहे थे।

उन्होंने धीरे-धीरे सिर हिलाया।

"यह सच कह रहा है।"

एलारा की आवाज़ काँप गई।

"दादी... यह क्या कह रहे हैं?"

मारा उसे झोपड़ी के भीतर ले गईं।

उन्होंने मिट्टी का पुराना संदूक निकाला, जिसे एलारा ने कभी खुलते नहीं देखा था।

संदूक के अंदर एक छोटी-सी चाँदी की चादर रखी थी। उस पर चमकते धागों से आधे चाँद का निशान बना था।

एक सुंदर चाँद के आकार का लॉकेट भी रखा था।

सबसे नीचे एक मुड़ा हुआ पत्र था।

मारा ने काँपते हाथों से वह पत्र एलारा को दे दिया।

जैसे ही उसने उसे खोला, उस पर लिखे शब्द अपने आप चमकने लगे।

"यदि यह पत्र मेरी बेटी के हाथों में पहुँचा है, तो समझो कि चंद्रलोक संकट में है।

उसे कभी यह मत समझने देना कि हमने उसे छोड़ दिया।

हमने उसे बचाने के लिए अपने दिल का सबसे प्यारा हिस्सा दुनिया से दूर भेजा था।

जब चाँद की रोशनी बुझने लगे, तब वही लौटेगी और दोनों संसारों को बचाएगी।

मेरी बेटी...

तुम जहाँ भी रहो, यह मत भूलना कि मैं हर रात तुम्हें चाँद की रोशनी में देखती रही हूँ।

— तुम्हारी माँ,
चंद्र रानी सेलीन।"

पत्र पढ़ते ही एलारा की आँखों से आँसू बह निकले।

"तो... मैं आपकी बेटी नहीं हूँ?"

मारा तुरंत उसके पास बैठ गईं।

उन्होंने उसका चेहरा दोनों हाथों में थाम लिया।

"खून से नहीं... लेकिन दिल से तुम मेरी बेटी हो। जिस रात तुम्हें मेरी गोद में सौंपा गया था, उसी रात मैंने तय कर लिया था कि चाहे दुनिया कुछ भी कहे, तुम्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी।"

एलारा फूट-फूटकर रो पड़ी और मारा से लिपट गई।

"मेरी माँ तो आप ही हैं..."

मारा ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा,

"और यही बात कभी मत भूलना।"

बाहर सफेद हिरण अब भी शांत खड़ा था।

उसने कहा,

"समय बहुत कम है। यदि आज रात हम नहीं चले, तो चंद्रलोक हमेशा के लिए अंधकार में डूब जाएगा।"

एलारा ने आखिरी बार अपनी झोपड़ी को देखा।

वही मिट्टी का आँगन।

वही आम का पेड़।

वही छोटी-सी खिड़की जहाँ बैठकर वह चाँद देखा करती थी।

उसने गहरी साँस ली और मारा का हाथ कसकर पकड़ लिया।

"मैं लौटकर आऊँगी।"

मारा मुस्कुराईं।

"मुझे पता है। क्योंकि तुम्हारा घर सिर्फ़ वहाँ नहीं... यहाँ भी है।"

एलारा ने सफेद हिरण के साथ कदम बढ़ाया।

जंगल के बीच पहुँचकर वह एक विशाल चमकते हुए दर्पण के सामने रुके।

उसका शीशा पानी की तरह लहरा रहा था।

हिरण बोला,

"डरो मत। इसके उस पार तुम्हारी दूसरी दुनिया तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।"

एलारा ने धीरे से अपना हाथ दर्पण पर रखा।

एक पल में चारों ओर की दुनिया घूमने लगी।

उसे लगा जैसे वह हवा में उड़ रही हो।

जब उसने आँखें खोलीं तो उसकी साँसें थम गईं।

उसके सामने ऐसा संसार था जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

आसमान में एक नहीं, दर्जनों चमकते चाँद तैर रहे थे।

सफेद पहाड़ों के बीच चाँदी की नदियाँ बह रही थीं।

पेड़ों की पत्तियाँ काँच की तरह चमक रही थीं।

महल बादलों के ऊपर बने थे।

हर तरफ़ ऐसी सुंदरता थी कि शब्द छोटे पड़ जाएँ।

लेकिन उस सुंदरता के पीछे एक गहरा दुख छिपा था।

महलों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी थीं।

नदियों की चमक फीकी हो रही थी।

फूल मुरझा रहे थे।

आसमान के कई तारे बुझ चुके थे।

ऐसा लग रहा था मानो पूरा चंद्रलोक धीरे-धीरे अपनी आखिरी साँसें ले रहा हो।

एलारा ने धीमे से पूछा,

"यह सब... किसने किया?"

सफेद हिरण ने दूर क्षितिज की ओर देखा।

वहाँ काले धुएँ से ढका एक विशाल पर्वत दिखाई दे रहा था।

उसकी आवाज़ गंभीर हो गई।

"अंधकार का राजा वापस आ चुका है... और अगर उसे रोका नहीं गया, तो पहले चंद्रलोक मिटेगा... फिर तुम्हारा गाँव... और उसके बाद पूरी दुनिया।"

एलारा ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं।

उसे अभी तक यकीन नहीं हो रहा था कि वह सचमुच किसी दूसरे लोक में खड़ी है।

लेकिन एक बात वह समझ चुकी थी।

अब उसकी ज़िंदगी पहले जैसी कभी नहीं रहने वाली थी...

एलारा अभी भी उस अद्भुत संसार को देख रही थी। उसकी आँखों में हैरानी थी, लेकिन दिल में एक अजीब-सी बेचैनी भी। जितनी सुंदर यह दुनिया दिखाई दे रही थी, उतनी ही उदास भी लग रही थी। ऐसा लगता था जैसे यहाँ की हर चीज़ अपनी आख़िरी उम्मीद पर टिकी हो।

सफेद हिरण उसे एक लंबे चमकते रास्ते पर लेकर आगे बढ़ा। रास्ते के दोनों ओर ऐसे पेड़ थे जिनकी पत्तियाँ चाँदी की तरह चमक रही थीं। जब हवा चलती तो उनसे घंटियों जैसी मधुर आवाज़ निकलती।

कुछ दूर चलने के बाद वे एक विशाल महल के सामने पहुँचे। पूरा महल सफेद पत्थरों से बना था, लेकिन उन पत्थरों की चमक अब फीकी पड़ चुकी थी। कई जगह दरारें साफ दिखाई दे रही थीं।

महल का बड़ा दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

अंदर बहुत से लोग खड़े थे।

कुछ इंसानों जैसे थे, कुछ परियों जैसे, कुछ ऐसे जिन्हें देखकर लगता था कि वे सितारों की रोशनी से बने हों। सबकी नज़रें एलारा पर टिक गईं।

एक बुज़ुर्ग महिला आगे बढ़ीं। उनके लंबे सफेद बाल कमर तक थे और हाथ में चमकती हुई छड़ी थी।

उन्होंने झुककर कहा,

"चंद्रलोक की राजकुमारी का स्वागत है।"

एलारा घबरा गई।

"कृपया मुझे राजकुमारी मत कहिए। मैं बस एक साधारण लड़की हूँ।"

बुज़ुर्ग महिला मुस्कुराईं।

"साधारण लोग ही असाधारण काम करते हैं।"

उन्होंने अपना परिचय दिया।

"मेरा नाम लिसांद्रा है। मैं इस राज्य की सबसे पुरानी संरक्षिका हूँ। तुम्हारे जन्म से पहले भी मैं यहाँ थी।"

एलारा ने धीरे से पूछा,

"क्या... मेरी माँ सचमुच यहाँ हैं?"

लिसांद्रा की मुस्कान अचानक फीकी पड़ गई।

"हैं भी... और नहीं भी।"

एलारा कुछ समझ नहीं पाई।

तभी महल के बीचों-बीच रखा एक विशाल गोल दर्पण चमकने लगा।

लिसांद्रा बोलीं,

"आज तुम्हें वह सच देखना होगा जिसे इतने वर्षों तक तुमसे छिपाया गया।"

दर्पण में धुंध छाने लगी।

धीरे-धीरे उसमें एक दृश्य दिखाई देने लगा।

चंद्रलोक पहले से बिल्कुल अलग था।

हर ओर उत्सव था।

महल रोशनी से जगमगा रहा था।

हजारों लोग खुशी मना रहे थे।

महल की सबसे ऊँची बालकनी पर एक सुंदर रानी खड़ी थीं। उनके हाथों में एक छोटी-सी बच्ची थी।

वह बच्ची मुस्कुरा रही थी।

एलारा की साँस रुक गई।

"यह... मैं हूँ?"

लिसांद्रा ने सिर हिला दिया।

उसी समय अचानक आसमान काला पड़ गया।

चाँद की रोशनी गायब होने लगी।

काले बादलों के बीच से एक विशाल परछाईं उतरी।

उसकी आँखें आग की तरह लाल थीं।

उसकी आवाज़ पूरे राज्य में गूँज उठी।

"आज से चंद्रलोक मेरा होगा।"

हजारों सैनिक युद्ध के लिए दौड़ पड़े।

चारों ओर चीखें सुनाई देने लगीं।

रानी ने बच्ची को अपनी छाती से लगा लिया।

उनकी आँखों में आँसू थे।

उन्होंने कहा,

"यदि मेरी बेटी यहीं रही, तो अंधकार उसे भी मार देगा।"

तभी एक चमकता हुआ द्वार खुला।

मारा उस द्वार के दूसरी ओर खड़ी थीं।

रानी ने बच्ची को उनकी गोद में सौंप दिया।

"इसे अपनी बेटी की तरह पालना।"

मारा ने बिना एक पल गँवाए बच्ची को सीने से लगा लिया।

"मैं अपनी जान देकर भी इसकी रक्षा करूँगी।"

रानी ने बच्ची के माथे को चूमा।

"एक दिन यह लौटेगी... और वहाँ जीत हासिल करेगी जहाँ हम हार गए।"

अगले ही पल द्वार बंद हो गया।

दर्पण का दृश्य खत्म हो गया।

महल में सन्नाटा छा गया।

एलारा की आँखों से आँसू बह रहे थे।

उसे पहली बार समझ आया कि उसकी माँ ने उसे छोड़ा नहीं था।

उन्होंने उसे बचाया था।

उसने धीमे से कहा,

"उन्होंने मुझे कभी भुलाया नहीं..."

लिसांद्रा बोलीं,

"हर पूर्णिमा की रात वह तुम्हें चाँद की रोशनी से देखती थीं।"

"क्या मैं उनसे मिल सकती हूँ?"

"यदि तुम चंद्रलोक को बचा सकीं... तो हाँ।"

इतने में पूरे महल में तेज़ कंपन होने लगा।

दीवारों से धूल गिरने लगी।

एक सैनिक भागता हुआ अंदर आया।

"अंधकार की सेना सीमा तक पहुँच गई है।"

सभी के चेहरे उतर गए।

लिसांद्रा ने एलारा को महल के नीचे बने एक गुप्त कक्ष में ले गईं।

कमरे के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा चमकता हुआ क्रिस्टल हवा में तैर रहा था।

उसकी रोशनी धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।

उसमें गहरी दरारें पड़ चुकी थीं।

"यह क्या है?" एलारा ने पूछा।

"यह चंद्रलोक का हृदय है।"

"जब तक इसकी रोशनी जलती रहती है, चाँद भी चमकता रहता है।"

"और यदि यह बुझ गया?"

लिसांद्रा ने गहरी साँस ली।

"तो पहले चंद्रलोक मिटेगा... फिर तुम्हारा गाँव... फिर पूरी पृथ्वी पर अंधकार फैल जाएगा।"

एलारा ने उस क्रिस्टल को ध्यान से देखा।

उसे लगा जैसे वह उसे पुकार रहा हो।

वह धीरे-धीरे उसके पास गई।

जैसे ही उसने अपना हाथ उस पर रखा, पूरा कक्ष चाँदी की रोशनी से भर गया।

दरारों में कुछ पल के लिए चमक लौट आई।

सब लोग हैरान रह गए।

लिसांद्रा की आँखों में उम्मीद दिखाई दी।

"भविष्यवाणी सच थी।"

"सिर्फ तुम ही इसे फिर से जागृत कर सकती हो।"

"लेकिन कैसे?"

"इसके लिए तुम्हें प्रथम प्रकाश का मुकुट वापस लाना होगा।"

"वह कहाँ है?"

लिसांद्रा ने दूर अंधेरे पहाड़ों की ओर इशारा किया।

"जहाँ से आज तक कोई जीवित लौटकर नहीं आया।"

उसी समय पीछे से एक हँसमुख आवाज़ आई।

"अगर कोई पहली बार जाएगा, तो पहली बार लौटकर भी आएगा।"

एलारा ने पीछे मुड़कर देखा।

एक छोटा-सा लाल लोमड़ खड़ा था।

उसकी बड़ी-बड़ी चमकती आँखें थीं और चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी।

"मैं फिन हूँ।"

वह झुककर बोला,

"और मुझे दुनिया की लगभग हर भाषा आती है... यहाँ तक कि पेड़ों और पक्षियों की भी।"

एलारा मुस्कुरा दी।

कई घंटों बाद पहली बार उसके चेहरे पर मुस्कान आई थी।

तभी एक छोटी-सी परी हवा में उड़ती हुई आई।

उसके हाथ में सुनहरी तलवार थी।

"मैं नेरिया हूँ।"

उसने आत्मविश्वास से कहा,

"और मैं तुम्हारी रक्षा करूँगी।"

उनके पीछे भारी कदमों की आवाज़ आई।

जमीन हल्की-सी काँप गई।

एक बहुत विशालकाय दैत्य अंदर आया।

लेकिन उसकी आँखों में कठोरता नहीं, अपनापन था।

उसने मुस्कुराकर कहा,

"मेरा नाम बोरिन है। लोग मुझे देखकर डर जाते हैं... लेकिन मैं बच्चों को कहानियाँ सुनाना ज़्यादा पसंद करता हूँ।"

एलारा हँस पड़ी।

उसे महसूस हुआ कि वह अकेली नहीं है।

लिसांद्रा ने चारों की ओर देखते हुए कहा,

"आज से तुम सब एक दल हो।"

"तुम्हारा लक्ष्य है—प्रथम प्रकाश का मुकुट वापस लाना।"

"याद रखना... रास्ते में सबसे बड़ा दुश्मन अंधकार का राजा नहीं होगा।"

एलारा ने पूछा,

"तो फिर कौन होगा?"

लिसांद्रा ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,

"तुम्हारा अपना डर।"

महल के बाहर रात और भी काली होती जा रही थी।

दूर पहाड़ों के पीछे लाल बिजली चमक रही थी।

ऐसा लग रहा था जैसे अंधकार का राजा उनकी हर बात सुन रहा हो।

अगली सुबह सूरज नहीं निकला।

क्योंकि चंद्रलोक में सूरज कभी उगता ही नहीं था।

यहाँ हर सुबह चाँद की हल्की सफेद रोशनी से होती थी।

लेकिन आज वह रोशनी भी बहुत कमजोर थी।

एलारा ने अपनी गर्दन में माँ का दिया हुआ चाँद वाला लॉकेट पहन लिया।

उसने आख़िरी बार महल की ओर देखा।

फिर अपने नए साथियों के साथ उस यात्रा पर निकल पड़ी, जो केवल चंद्रलोक का नहीं, बल्कि उसके अपने जीवन का भी सबसे बड़ा इम्तिहान बनने वाली थी...

महल से बाहर निकलते ही चारों ओर फैली सफेद घाटियाँ दिखाई देने लगीं। दूर-दूर तक चाँदी जैसी चमकती घास हवा के साथ लहरा रही थी। ऊपर आसमान में कई छोटे-छोटे चाँद तैर रहे थे, लेकिन उनकी रोशनी पहले जैसी उजली नहीं थी। हर कदम पर ऐसा लगता था जैसे पूरा चंद्रलोक धीरे-धीरे अपनी साँसें खो रहा हो।

एलारा ने मन ही मन एक वचन लिया।

"जब तक मेरी साँसें चल रही हैं, मैं इस दुनिया को अंधेरे में डूबने नहीं दूँगी।"

यात्रा शुरू हुए कई घंटे बीत गए।

फिन कभी आगे दौड़ता, कभी किसी पेड़ से बातें करने लगता। नेरिया हमेशा चारों ओर नज़र रखती। बोरिन भारी कदमों से चलता, लेकिन जब भी कोई छोटा जीव रास्ते में आ जाता, वह उसे बड़ी सावधानी से हटाकर आगे बढ़ता।

एलारा यह सब देखकर मुस्कुरा देती।

उसे महसूस हुआ कि ताकत केवल बड़ी तलवार या जादू में नहीं होती, बल्कि दया में भी होती है।

चलते-चलते वे एक ऐसे जंगल में पहुँचे जहाँ हर पेड़ काँच की तरह पारदर्शी था। उनकी शाखाओं पर हजारों छोटे-छोटे सितारे लटक रहे थे।

फिन अचानक रुक गया।

उसके कान खड़े हो गए।

"कुछ ठीक नहीं है।"

अगले ही पल चारों तरफ़ से काला धुआँ फैलने लगा।

उस धुएँ से अजीब-अजीब आकृतियाँ बनने लगीं। कुछ इंसानों जैसी, कुछ जानवरों जैसी और कुछ ऐसी जिनका कोई रूप ही नहीं था।

उनकी आवाज़ें हवा में गूँजने लगीं।

"वापस लौट जाओ..."

"तुम यह यात्रा पूरी नहीं कर पाओगी..."

"तुम्हें कोई नहीं चाहता..."

एलारा ने अपने कान बंद कर लिए।

लेकिन आवाज़ें उसके मन के भीतर तक पहुँच रही थीं।

अचानक उसे लगा जैसे वह फिर से अपने गाँव में खड़ी हो।

लोग उसकी ओर उँगली उठाकर कह रहे थे,

"यह हमारी नहीं है।"

"यह अजनबी है।"

"इसे यहाँ से चले जाना चाहिए।"

एलारा की आँखों में आँसू भर आए।

तभी मारा की आवाज़ उसके कानों में गूँजी।

"बेटी, दूसरों की बातें कभी यह तय नहीं करतीं कि तुम कौन हो। तुम्हारा दिल ही तुम्हारी पहचान है।"

एलारा ने अपनी आँखें बंद कीं।

उसने गहरी साँस ली।

फिर ऊँची आवाज़ में बोली,

"मैं किसी की नफरत से नहीं, अपने प्यार से पहचानी जाती हूँ।"

इतना कहते ही उसके लॉकेट से चाँदी जैसी रोशनी निकली।

वह रोशनी चारों ओर फैल गई।

सारी काली आकृतियाँ धुएँ की तरह गायब हो गईं।

जंगल फिर से शांत हो गया।

नेरिया मुस्कुराई।

"पहली परीक्षा पूरी हुई।"

एलारा हैरान हुई।

"परीक्षा?"

फिन ने सिर हिलाया।

"हाँ। यह डर का जंगल था। यहाँ हर यात्री को अपने मन के सबसे बड़े डर का सामना करना पड़ता है।"

बोरिन हँसते हुए बोला,

"मैं जब पहली बार यहाँ आया था, तब मुझे लगा था कि मेरे सारे दोस्त मुझे छोड़कर चले गए हैं। मैं दो दिन तक रोता रहा था।"

सब हँस पड़े।

कुछ देर बाद वे एक गहरी घाटी के किनारे पहुँचे।

उसके ऊपर केवल चाँदनी से बना एक पतला-सा पुल था।

नीचे अंतहीन अंधेरा था।

फिन बोला,

"इसे चाँदनी का पुल कहते हैं।"

"क्या यह मजबूत है?" एलारा ने पूछा।

"अगर दिल में सच्चाई हो तो हाँ।"

सब एक-एक करके पुल पर चलने लगे।

जब एलारा बीच में पहुँची, तभी हवा में फिर वही आवाज़ गूँजी।

इस बार आवाज़ बहुत कोमल थी।

"एलारा..."

वह ठिठक गई।

उसने पीछे देखा।

उसे मारा दिखाई दीं।

वह रो रही थीं।

"बेटी, मुझे छोड़कर मत जाओ।"

एलारा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।

उसने एक कदम पीछे बढ़ाया।

तभी फिन चिल्लाया,

"मत देखो! यह छलावा है।"

लेकिन एलारा का मन मानने को तैयार नहीं था।

"अगर सच में दादी हों तो?"

नेरिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"जो लोग तुमसे सच्चा प्यार करते हैं, वे तुम्हें तुम्हारे कर्तव्य से कभी नहीं रोकेंगे।"

एलारा ने फिर एक बार आँखें बंद कीं।

उसने मारा की मुस्कान याद की।

उन्हें विदा करते समय कही हुई बात याद आई।

"तुम्हारा घर यहाँ भी है। लौटकर ज़रूर आना।"

एलारा ने आँखें खोलीं।

सामने मारा नहीं थीं।

वहाँ केवल काला धुआँ था।

वह तुरंत आगे बढ़ी।

जैसे ही उसने पुल पार किया, पूरा पुल पहले से भी अधिक चमकने लगा।

आकाश में एक नया तारा जगमगा उठा।

फिन खुशी से उछल पड़ा।

"देखा! हर परीक्षा जीतने पर चंद्रलोक की रोशनी थोड़ी लौट आती है।"

रात होने तक वे एक विशाल झील के किनारे पहुँचे।

झील का पानी बिल्कुल शांत था।

उसमें पूरा आसमान दिखाई दे रहा था।

बोरिन ने लकड़ियाँ इकट्ठी करके आग जलाई।

सब उसके चारों ओर बैठ गए।

कई दिनों बाद सबने चैन की साँस ली।

फिन ने मुस्कुराते हुए पूछा,

"एलारा, तुम्हें सबसे ज़्यादा किस चीज़ की याद आ रही है?"

एलारा बिना सोचे बोली,

"दादी के हाथ की रोटी।"

सब हँस पड़े।

बोरिन बोला,

"जब यह सब खत्म हो जाएगा, तब मैं तुम्हारे गाँव चलूँगा।"

"क्यों?"

"सुना है वहाँ बहुत स्वादिष्ट खाना मिलता है।"

नेरिया मुस्कुराई।

"और मैं उन बच्चों को उड़ना सिखाऊँगी जो सपने देखने से नहीं डरते।"

एलारा ने पहली बार महसूस किया कि यह सफर केवल एक युद्ध नहीं था।

यह दोस्ती का सफर भी था।

रात गहरी हो गई।

सब सो गए।

लेकिन एलारा की आँखों में नींद नहीं थी।

वह झील के किनारे जाकर बैठ गई।

उसने पानी में अपना चेहरा देखा।

अचानक पानी चमकने लगा।

धीरे-धीरे उसमें एक परिचित चेहरा दिखाई दिया।

वही स्त्री...

जिसे वह बचपन से अपने सपनों में देखती आई थी।

चंद्र रानी सेलीन।

उनकी आँखों में प्यार था।

उन्होंने मुस्कुराकर कहा,

"मेरी बेटी..."

एलारा की आँखें भर आईं।

"माँ..."

"मुझे माफ़ कर दीजिए।"

रानी ने सिर हिलाया।

"माफी मुझे माँगनी चाहिए कि मैं तुम्हें अपने पास नहीं रख सकी।"

"मैंने कभी आपको दोष नहीं दिया... बस समझ नहीं पाई।"

रानी की आँखों से आँसू बह निकले।

"तुम्हारे जन्म के दिन पूरे चंद्रलोक में उत्सव था। लेकिन उसी रात अंधकार का राजा जाग गया। उसने भविष्यवाणी सुन ली थी कि एक दिन मेरी बेटी उसकी हार का कारण बनेगी। इसलिए तुम्हें बचाने के लिए मुझे तुम्हें अपने से दूर भेजना पड़ा।"

"क्या आप सचमुच मुझे देखती थीं?"

रानी मुस्कुराईं।

"हर पूर्णिमा की रात। जब भी तुम चाँद को देखकर मुस्कुराती थीं, मेरी दुनिया रोशन हो जाती थी।"

एलारा कुछ कह पाती, उससे पहले पानी में लहर उठी।

रानी का चेहरा धुंधला होने लगा।

"हम फिर मिलेंगे..."

"लेकिन याद रखना..."

"तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत तुम्हारा जादू नहीं... तुम्हारा दयालु दिल है।"

अगले ही पल झील फिर शांत हो गई।

एलारा देर तक वहीं बैठी रही।

उसने आसमान की ओर देखा।

उसे लगा जैसे बहुत दूर कोई उसे आशीर्वाद दे रहा हो।

सुबह होते ही चारों फिर यात्रा पर निकल पड़े।

कई घंटों बाद वे उन काले पहाड़ों के सामने खड़े थे जिन्हें देखकर पूरे चंद्रलोक में लोग डरते थे।

हवा बर्फ जैसी ठंडी थी।

चारों ओर सन्नाटा था।

पहाड़ की चोटी पर काले पत्थरों से बना एक विशाल किला दिखाई दे रहा था।

फिन की मुस्कान पहली बार गायब थी।

नेरिया ने अपनी तलवार कसकर पकड़ ली।

बोरिन ने गहरी साँस ली।

एलारा ने धीरे से पूछा,

"यही है?"

फिन ने गंभीर आवाज़ में कहा,

"हाँ..."

"अंधकार के राजा का महल..."

और शायद...

यहीं हमारी सबसे कठिन परीक्षा हमारा इंतज़ार कर रही है।

महल से बाहर निकलते ही चारों ओर फैली सफेद घाटियाँ दिखाई देने लगीं। दूर-दूर तक चाँदी जैसी चमकती घास हवा के साथ लहरा रही थी। ऊपर आसमान में कई छोटे-छोटे चाँद तैर रहे थे, लेकिन उनकी रोशनी पहले जैसी उजली नहीं थी। हर कदम पर ऐसा लगता था जैसे पूरा चंद्रलोक धीरे-धीरे अपनी साँसें खो रहा हो।

एलारा ने मन ही मन एक वचन लिया।

"जब तक मेरी साँसें चल रही हैं, मैं इस दुनिया को अंधेरे में डूबने नहीं दूँगी।"

यात्रा शुरू हुए कई घंटे बीत गए।

फिन कभी आगे दौड़ता, कभी किसी पेड़ से बातें करने लगता। नेरिया हमेशा चारों ओर नज़र रखती। बोरिन भारी कदमों से चलता, लेकिन जब भी कोई छोटा जीव रास्ते में आ जाता, वह उसे बड़ी सावधानी से हटाकर आगे बढ़ता।

एलारा यह सब देखकर मुस्कुरा देती।

उसे महसूस हुआ कि ताकत केवल बड़ी तलवार या जादू में नहीं होती, बल्कि दया में भी होती है।

चलते-चलते वे एक ऐसे जंगल में पहुँचे जहाँ हर पेड़ काँच की तरह पारदर्शी था। उनकी शाखाओं पर हजारों छोटे-छोटे सितारे लटक रहे थे।

फिन अचानक रुक गया।

उसके कान खड़े हो गए।

"कुछ ठीक नहीं है।"

अगले ही पल चारों तरफ़ से काला धुआँ फैलने लगा।

उस धुएँ से अजीब-अजीब आकृतियाँ बनने लगीं। कुछ इंसानों जैसी, कुछ जानवरों जैसी और कुछ ऐसी जिनका कोई रूप ही नहीं था।

उनकी आवाज़ें हवा में गूँजने लगीं।

"वापस लौट जाओ..."

"तुम यह यात्रा पूरी नहीं कर पाओगी..."

"तुम्हें कोई नहीं चाहता..."

एलारा ने अपने कान बंद कर लिए।

लेकिन आवाज़ें उसके मन के भीतर तक पहुँच रही थीं।

अचानक उसे लगा जैसे वह फिर से अपने गाँव में खड़ी हो।

लोग उसकी ओर उँगली उठाकर कह रहे थे,

"यह हमारी नहीं है।"

"यह अजनबी है।"

"इसे यहाँ से चले जाना चाहिए।"

एलारा की आँखों में आँसू भर आए।

तभी मारा की आवाज़ उसके कानों में गूँजी।

"बेटी, दूसरों की बातें कभी यह तय नहीं करतीं कि तुम कौन हो। तुम्हारा दिल ही तुम्हारी पहचान है।"

एलारा ने अपनी आँखें बंद कीं।

उसने गहरी साँस ली।

फिर ऊँची आवाज़ में बोली,

"मैं किसी की नफरत से नहीं, अपने प्यार से पहचानी जाती हूँ।"

इतना कहते ही उसके लॉकेट से चाँदी जैसी रोशनी निकली।

वह रोशनी चारों ओर फैल गई।

सारी काली आकृतियाँ धुएँ की तरह गायब हो गईं।

जंगल फिर से शांत हो गया।

नेरिया मुस्कुराई।

"पहली परीक्षा पूरी हुई।"

एलारा हैरान हुई।

"परीक्षा?"

फिन ने सिर हिलाया।

"हाँ। यह डर का जंगल था। यहाँ हर यात्री को अपने मन के सबसे बड़े डर का सामना करना पड़ता है।"

बोरिन हँसते हुए बोला,

"मैं जब पहली बार यहाँ आया था, तब मुझे लगा था कि मेरे सारे दोस्त मुझे छोड़कर चले गए हैं। मैं दो दिन तक रोता रहा था।"

सब हँस पड़े।

कुछ देर बाद वे एक गहरी घाटी के किनारे पहुँचे।

उसके ऊपर केवल चाँदनी से बना एक पतला-सा पुल था।

नीचे अंतहीन अंधेरा था।

फिन बोला,

"इसे चाँदनी का पुल कहते हैं।"

"क्या यह मजबूत है?" एलारा ने पूछा।

"अगर दिल में सच्चाई हो तो हाँ।"

सब एक-एक करके पुल पर चलने लगे।

जब एलारा बीच में पहुँची, तभी हवा में फिर वही आवाज़ गूँजी।

इस बार आवाज़ बहुत कोमल थी।

"एलारा..."

वह ठिठक गई।

उसने पीछे देखा।

उसे मारा दिखाई दीं।

वह रो रही थीं।

"बेटी, मुझे छोड़कर मत जाओ।"

एलारा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।

उसने एक कदम पीछे बढ़ाया।

तभी फिन चिल्लाया,

"मत देखो! यह छलावा है।"

लेकिन एलारा का मन मानने को तैयार नहीं था।

"अगर सच में दादी हों तो?"

नेरिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"जो लोग तुमसे सच्चा प्यार करते हैं, वे तुम्हें तुम्हारे कर्तव्य से कभी नहीं रोकेंगे।"

एलारा ने फिर एक बार आँखें बंद कीं।

उसने मारा की मुस्कान याद की।

उन्हें विदा करते समय कही हुई बात याद आई।

"तुम्हारा घर यहाँ भी है। लौटकर ज़रूर आना।"

एलारा ने आँखें खोलीं।

सामने मारा नहीं थीं।

वहाँ केवल काला धुआँ था।

वह तुरंत आगे बढ़ी।

जैसे ही उसने पुल पार किया, पूरा पुल पहले से भी अधिक चमकने लगा।

आकाश में एक नया तारा जगमगा उठा।

फिन खुशी से उछल पड़ा।

"देखा! हर परीक्षा जीतने पर चंद्रलोक की रोशनी थोड़ी लौट आती है।"

रात होने तक वे एक विशाल झील के किनारे पहुँचे।

झील का पानी बिल्कुल शांत था।

उसमें पूरा आसमान दिखाई दे रहा था।

बोरिन ने लकड़ियाँ इकट्ठी करके आग जलाई।

सब उसके चारों ओर बैठ गए।

कई दिनों बाद सबने चैन की साँस ली।

फिन ने मुस्कुराते हुए पूछा,

"एलारा, तुम्हें सबसे ज़्यादा किस चीज़ की याद आ रही है?"

एलारा बिना सोचे बोली,

"दादी के हाथ की रोटी।"

सब हँस पड़े।

बोरिन बोला,

"जब यह सब खत्म हो जाएगा, तब मैं तुम्हारे गाँव चलूँगा।"

"क्यों?"

"सुना है वहाँ बहुत स्वादिष्ट खाना मिलता है।"

नेरिया मुस्कुराई।

"और मैं उन बच्चों को उड़ना सिखाऊँगी जो सपने देखने से नहीं डरते।"

एलारा ने पहली बार महसूस किया कि यह सफर केवल एक युद्ध नहीं था।

यह दोस्ती का सफर भी था।

रात गहरी हो गई।

सब सो गए।

लेकिन एलारा की आँखों में नींद नहीं थी।

वह झील के किनारे जाकर बैठ गई।

उसने पानी में अपना चेहरा देखा।

अचानक पानी चमकने लगा।

धीरे-धीरे उसमें एक परिचित चेहरा दिखाई दिया।

वही स्त्री...

जिसे वह बचपन से अपने सपनों में देखती आई थी।

चंद्र रानी सेलीन।

उनकी आँखों में प्यार था।

उन्होंने मुस्कुराकर कहा,

"मेरी बेटी..."

एलारा की आँखें भर आईं।

"माँ..."

"मुझे माफ़ कर दीजिए।"

रानी ने सिर हिलाया।

"माफी मुझे माँगनी चाहिए कि मैं तुम्हें अपने पास नहीं रख सकी।"

"मैंने कभी आपको दोष नहीं दिया... बस समझ नहीं पाई।"

रानी की आँखों से आँसू बह निकले।

"तुम्हारे जन्म के दिन पूरे चंद्रलोक में उत्सव था। लेकिन उसी रात अंधकार का राजा जाग गया। उसने भविष्यवाणी सुन ली थी कि एक दिन मेरी बेटी उसकी हार का कारण बनेगी। इसलिए तुम्हें बचाने के लिए मुझे तुम्हें अपने से दूर भेजना पड़ा।"

"क्या आप सचमुच मुझे देखती थीं?"

रानी मुस्कुराईं।

"हर पूर्णिमा की रात। जब भी तुम चाँद को देखकर मुस्कुराती थीं, मेरी दुनिया रोशन हो जाती थी।"

एलारा कुछ कह पाती, उससे पहले पानी में लहर उठी।

रानी का चेहरा धुंधला होने लगा।

"हम फिर मिलेंगे..."

"लेकिन याद रखना..."

"तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत तुम्हारा जादू नहीं... तुम्हारा दयालु दिल है।"

अगले ही पल झील फिर शांत हो गई।

एलारा देर तक वहीं बैठी रही।

उसने आसमान की ओर देखा।

उसे लगा जैसे बहुत दूर कोई उसे आशीर्वाद दे रहा हो।

सुबह होते ही चारों फिर यात्रा पर निकल पड़े।

कई घंटों बाद वे उन काले पहाड़ों के सामने खड़े थे जिन्हें देखकर पूरे चंद्रलोक में लोग डरते थे।

हवा बर्फ जैसी ठंडी थी।

चारों ओर सन्नाटा था।

पहाड़ की चोटी पर काले पत्थरों से बना एक विशाल किला दिखाई दे रहा था।

फिन की मुस्कान पहली बार गायब थी।

नेरिया ने अपनी तलवार कसकर पकड़ ली।

बोरिन ने गहरी साँस ली।

एलारा ने धीरे से पूछा,

"यही है?"

फिन ने गंभीर आवाज़ में कहा,

"हाँ..."

"अंधकार के राजा का महल..."

और शायद...

यहीं हमारी सबसे कठिन परीक्षा हमारा इंतज़ार कर रही है।

किले तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था। काले पहाड़ों की चट्टानें इतनी ऊँची थीं कि लगता था जैसे वे आसमान को छू रही हों। हर तरफ़ ठंडी हवा सीटी बजाती हुई चल रही थी। उस हवा में ऐसी बेचैनी थी कि मजबूत से मजबूत इंसान का भी हौसला डगमगा जाए।

जैसे-जैसे वे ऊपर चढ़ते गए, चारों ओर की रोशनी कम होती गई। आखिरकार वे एक विशाल पत्थर के दरवाज़े के सामने पहुँच गए। दरवाज़े पर एक मुकुट बना था, लेकिन वह दो हिस्सों में टूटा हुआ था।

लिसांद्रा की बात एलारा को याद आई।

"प्रथम प्रकाश का मुकुट... वही इस संसार की आखिरी उम्मीद है।"

एलारा ने धीरे से दरवाज़े को छुआ।

भारी आवाज़ के साथ वह अपने आप खुल गया।

अंदर घना अंधेरा था।

दीवारों पर लगी मशालें काली लौ से जल रही थीं। वहाँ कोई सैनिक दिखाई नहीं दे रहा था, फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे हजारों आँखें उन्हें देख रही हों।

वे सावधानी से आगे बढ़ने लगे।

अचानक ज़मीन काँपी।

उनके सामने तीन रास्ते खुल गए।

एक रास्ता चाँदी की रोशनी से चमक रहा था।

दूसरा पूरी तरह अंधेरे में डूबा था।

तीसरे पर रंग-बिरंगे फूल खिले थे।

फिन बोला, "मुझे यह जगह पसंद नहीं आ रही।"

नेरिया ने तलवार निकाल ली।

"सावधान रहना। यहाँ जो दिखता है, वह सच नहीं भी हो सकता।"

तभी एक गूँजती हुई आवाज़ पूरे किले में फैल गई।

"यदि मुकुट चाहिए... तो पहले अपने दिल की सच्चाई साबित करो।"

अचानक तीनों रास्तों पर अलग-अलग दृश्य दिखाई देने लगे।

पहले रास्ते पर एलारा ने अपने गाँव को देखा।

मारा दरवाज़े पर बैठी थीं। बच्चे खेल रहे थे। सब उसे पुकार रहे थे।

"घर लौट आओ..."

दूसरे रास्ते पर उसने चंद्रलोक देखा।

लोग उसकी ओर उम्मीद से देख रहे थे।

तीसरे रास्ते पर एक सुनहरा सिंहासन था।

उस पर मुकुट रखा था।

उसके चारों ओर सोना, हीरे और अनगिनत खजाने थे।

एक मीठी आवाज़ आई,

"बस इस रास्ते पर चलो... बिना किसी लड़ाई के सब कुछ तुम्हारा हो जाएगा।"

फिन ने फुसफुसाकर कहा,

"यह लालच का जाल है।"

एलारा ने तीनों रास्तों को ध्यान से देखा।

फिर उसने कहा,

"इनमें से कोई भी सही नहीं है।"

सब उसकी ओर देखने लगे।

"अगर यह सच्चाई की परीक्षा है, तो सही रास्ता वह होगा जो दिखाई ही नहीं दे रहा।"

इतना कहकर उसने तीनों रास्तों के बीच की खाली जगह पर कदम रख दिया।

अचानक वहाँ चाँदी का एक नया रास्ता बन गया।

पूरा किला चमक उठा।

गूँजती हुई आवाज़ फिर सुनाई दी।

"पहली परीक्षा पूरी हुई।"

चारों आगे बढ़े।

कुछ दूर जाकर उन्हें एक गोल कक्ष मिला।

कमरे के बीचों-बीच हवा में प्रथम प्रकाश का मुकुट रखा था।

वह इतना सुंदर था कि उसकी रोशनी से पूरा कमरा जगमगा रहा था।

एलारा खुशी से आगे बढ़ी।

लेकिन तभी बोरिन ज़ोर से चिल्लाया,

"रुको!"

उसी पल मुकुट के सामने एक विशाल काली परछाईं खड़ी हो गई।

उसकी ऊँचाई किसी पेड़ से भी अधिक थी।

आँखें अंगारों की तरह जल रही थीं।

उसने भारी आवाज़ में कहा,

"इतनी आसानी से नहीं।"

नेरिया ने बिना देर किए तलवार चला दी।

लेकिन तलवार उसके शरीर के आर-पार निकल गई।

उसे कोई चोट नहीं पहुँची।

फिन घबरा गया।

"यह कोई जीव नहीं है... यह डर से बना हुआ रक्षक है।"

वह परछाईं ज़ोर से हँसी।

"जिसके मन में डर होगा... वह मुझे कभी नहीं हरा पाएगा।"

उसने हाथ उठाया।

अचानक चारों साथी एक-दूसरे से अलग हो गए।

एलारा खुद को एक अंधेरे कमरे में अकेली खड़ी पाई।

वहाँ कोई नहीं था।

न फिन...

न नेरिया...

न बोरिन...

न मारा...

न उसकी माँ...

केवल सन्नाटा।

एक आवाज़ उसके चारों ओर गूँजने लगी।

"देखा..."

"आखिर में हर इंसान अकेला रह जाता है।"

"तुम्हें बचाने कोई नहीं आएगा।"

एलारा का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

उसे पहली बार सचमुच डर महसूस हुआ।

लेकिन तभी उसे मारा की एक बात याद आई।

"हिम्मत का मतलब डर का न होना नहीं है, बेटी। हिम्मत का मतलब है डर के बावजूद सही रास्ता चुनना।"

एलारा ने अपनी आँखें बंद कीं।

उसने अपने जीवन के हर उस व्यक्ति को याद किया जिसने उसे प्यार दिया था।

मारा...

फिन...

नेरिया...

बोरिन...

और वह माँ जिसे उसने कभी ठीक से जाना भी नहीं।

उसके होंठों पर मुस्कान आ गई।

उसने धीरे से कहा,

"मैं अकेली नहीं हूँ।"

बस इतना कहना था कि उसके लॉकेट से तेज़ चाँदनी निकली।

पूरा अंधेरा टूटने लगा।

एक-एक करके दीवारें गायब हो गईं।

उसके साथी फिर उसके सामने थे।

काली परछाईं दर्द से चीख उठी।

उसका शरीर धुएँ में बदलने लगा।

कुछ ही क्षणों में वह पूरी तरह मिट गई।

कमरे में फिर शांति छा गई।

मुकुट अब भी हवा में चमक रहा था।

एलारा धीरे-धीरे उसके पास पहुँची।

जैसे ही उसने मुकुट अपने हाथों में लिया, पूरा किला काँप उठा।

दूर कहीं से किसी के क्रोध से भरे ठहाके की आवाज़ आई।

"आख़िर तुम यहाँ तक पहुँच ही गई..."

सारे दरवाज़े अपने आप बंद हो गए।

काले धुएँ का एक विशाल भँवर कमरे के बीच बनने लगा।

उस भँवर से एक लंबा, शक्तिशाली व्यक्ति बाहर आया।

उसने काले कवच पहन रखे थे।

उसकी आँखों में लाल आग जल रही थी।

चेहरे पर घमंड भरी मुस्कान थी।

एलारा समझ गई...

यही था...

अंधकार का राजा।

उसने एलारा को ध्यान से देखा।

फिर मुस्कुराया।

"तुम बिल्कुल अपनी माँ जैसी दिखती हो..."

"लेकिन क्या तुम भी उसकी तरह अपने लोगों के लिए सब कुछ खो दोगी?"

एलारा ने मुकुट को अपने सीने से लगा लिया।

"अगर दूसरों को बचाने के लिए मुझे अपना सब कुछ देना पड़े..."

"तो मैं बिना सोचे दे दूँगी।"

अंधकार का राजा ज़ोर से हँसा।

"तो फिर आओ..."

"देखते हैं..."

"तुम्हारा प्रेम अधिक शक्तिशाली है..."

"या मेरा अंधकार।"

अंधकार का राजा धीरे-धीरे एलारा की ओर बढ़ा। उसके हर कदम के साथ ज़मीन काँपने लगी। कमरे की दीवारों पर काला धुआँ फैल गया और प्रथम प्रकाश का मुकुट भी अपनी चमक खोने लगा।

उसने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हें सच पता भी है कि इस मुकुट की शक्ति कैसे काम करती है?"

एलारा ने बिना डरे उसकी ओर देखा।

"नहीं। लेकिन इतना जानती हूँ कि इसका इस्तेमाल किसी को बचाने के लिए होता है, डराने के लिए नहीं।"

अंधकार का राजा ज़ोर से हँसा।

"यही तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी है। तुम्हें लगता है कि दया से युद्ध जीते जाते हैं।"

उसने अपना हाथ उठाया।

एक ही पल में चारों ओर काली लपटें उठने लगीं। फिन, नेरिया और बोरिन उन लपटों में घिर गए। वे बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अंधेरा उन्हें जकड़ता जा रहा था।

एलारा उनकी ओर दौड़ी, पर अंधकार का राजा उसके सामने आ खड़ा हुआ।

"पहले मुझे हराओ।"

उसने अपनी तलवार घुमाई। काली बिजली एलारा की ओर बढ़ी। एलारा ने मुकुट को अपने सामने कर लिया। मुकुट से निकली चाँदनी ने उस बिजली को रोक तो लिया, लेकिन उसकी रोशनी और भी कम हो गई।

अंधकार का राजा मुस्कुराया।

"देखा? शक्ति खत्म हो रही है।"

तभी फिन ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, "एलारा! मुकुट की नहीं... अपने दिल की सुनो!"

नेरिया बोली, "जादू तुम्हारे अंदर है!"

बोरिन ने पूरी ताकत से जंजीरों को खींचते हुए कहा, "हम पर भरोसा करो!"

एलारा की आँखें बंद हो गईं।

उसे अपना गाँव याद आया।

दादी मारा का चेहरा याद आया।

उनकी बातें याद आईं।

"अच्छे इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसका प्यार होता है।"

उसने मुकुट को दोनों हाथों से पकड़ा और धीरे से कहा,

"यदि इस संसार में प्रेम सचमुच सबसे बड़ी शक्ति है... तो मुझे वह शक्ति दो जिससे मैं किसी का विनाश नहीं, बल्कि सबकी रक्षा कर सकूँ।"

जैसे ही उसके शब्द पूरे हुए, मुकुट तेज़ी से चमकने लगा।

पूरा किला चाँदी की रोशनी से भर गया।

काली जंजीरें टूट गईं।

फिन, नेरिया और बोरिन आज़ाद हो गए।

अंधकार का राजा पहली बार घबरा गया।

"यह कैसे संभव है?"

लिसांद्रा की आवाज़ जैसे कहीं दूर से गूँजी,

"प्रथम प्रकाश का मुकुट कभी शक्ति से नहीं जागता... यह केवल निस्वार्थ प्रेम से जागता है।"

अंधकार का राजा क्रोध में दहाड़ा और उसने अपनी सारी अंधेरी शक्ति एक साथ एलारा पर छोड़ दी।

आसमान फटने लगा।

पहाड़ काँपने लगे।

ऐसा लगा मानो पूरा चंद्रलोक टूट जाएगा।

एलारा ने पीछे देखा।

उसके साथी उसके साथ खड़े थे।

फिन ने उसका हाथ पकड़ लिया।

नेरिया ने अपनी तलवार नीचे रख दी।

बोरिन ने मुस्कुराकर कहा,

"अब हम अकेले नहीं लड़ रहे।"

तभी चारों के शरीर से अलग-अलग रोशनी निकलने लगी।

उनकी रोशनी मुकुट में समाने लगी।

मुकुट पहले से भी अधिक चमक उठा।

एलारा ने उसे ऊपर उठा दिया।

"यह जीत मेरी नहीं..."

"हम सबकी है।"

उसके शब्दों के साथ ही मुकुट से निकली चाँदनी पूरे किले में फैल गई।

जहाँ-जहाँ वह रोशनी पहुँची, वहाँ-वहाँ अंधेरा पिघलने लगा।

अंधकार का राजा पीछे हटने लगा।

उसने पहली बार डरकर कहा,

"नहीं... यह नहीं हो सकता..."

एलारा उसकी ओर बढ़ी।

"तुम्हें हराने आई नहीं हूँ।"

"मैं केवल उस रोशनी को वापस लाने आई हूँ जिसे तुमने छीन लिया।"

रोशनी उसके चारों ओर फैल गई।

अंधकार का राजा चीखने लगा।

उसका काला कवच टूटने लगा।

कुछ ही क्षणों में उसका शरीर धुएँ में बदल गया और हवा में बिखर गया।

उसके जाते ही पूरा किला हिलने लगा।

दीवारों की कालिमा गायब हो गई।

पत्थर फिर से सफेद चमकने लगे।

दूर-दूर तक फैले पहाड़ों पर चाँदनी लौट आई।

आसमान में एक-एक करके सारे तारे फिर चमक उठे।

एलारा, फिन, नेरिया और बोरिन तुरंत चंद्रलोक के महल की ओर लौटे।

महल के नीचे स्थित विशाल कक्ष में चंद्रलोक का हृदय अब भी मद्धम रोशनी दे रहा था।

लिसांद्रा वहाँ उनका इंतज़ार कर रही थीं।

उन्होंने कहा,

"अब अंतिम काम बाकी है।"

एलारा आगे बढ़ी।

उसने प्रथम प्रकाश का मुकुट धीरे से उस विशाल क्रिस्टल पर रखा।

एक पल के लिए सब कुछ शांत हो गया।

फिर अचानक इतनी तेज़ रोशनी फैली कि किसी की आँखें खुली नहीं रह सकीं।

जब रोशनी कम हुई तो सामने का दृश्य बदल चुका था।

क्रिस्टल की सारी दरारें भर चुकी थीं।

उसकी रोशनी पूरे चंद्रलोक में फैल रही थी।

सूखी नदियाँ फिर बहने लगीं।

मुरझाए फूल खिल उठे।

महलों की दरारें अपने आप भर गईं।

आसमान पहले से भी अधिक उजला हो गया।

उसी रोशनी के बीच एक परिचित आकृति दिखाई दी।

सफेद वस्त्र...

ममता से भरी आँखें...

वही चेहरा जिसे एलारा ने बचपन से सपनों में देखा था।

"माँ..."

एलारा की आवाज़ काँप गई।

रानी सेलीन मुस्कुराईं।

उन्होंने अपनी बाँहें फैला दीं।

एलारा दौड़कर उनसे लिपट गई।

दोनों की आँखों से आँसू बह रहे थे।

"मैंने तुम्हें कभी नहीं छोड़ा, बेटी।"

"मुझे अब पता है।"

"हर रात मैं तुम्हें चाँद की रोशनी में देखती थी।"

"और मैं हर रात आपको अपने सपनों में देखती थी।"

कुछ देर तक दोनों बिना कुछ कहे एक-दूसरे को देखती रहीं।

फिर रानी ने एलारा का चेहरा अपने हाथों में लिया।

"आज तुमने वह कर दिखाया जो मैं भी नहीं कर सकी।"

"मैंने कुछ अकेले नहीं किया।"

एलारा ने मुस्कुराकर अपने साथियों की ओर देखा।

"अगर ये मेरे साथ न होते, तो मैं कभी सफल नहीं होती।"

रानी ने फिन, नेरिया और बोरिन को भी आशीर्वाद दिया।

महल के बाहर हजारों लोग इकट्ठा हो चुके थे।

हर कोई अपनी नई रानी का स्वागत करना चाहता था।

लिसांद्रा आगे बढ़ीं।

"चंद्रलोक आज से अपनी रानी का स्वागत करता है।"

सभी एक साथ झुक गए।

लेकिन एलारा कुछ पल चुप रही।

उसकी आँखों के सामने मारा का चेहरा घूम गया।

छोटी-सी झोपड़ी...

मिट्टी का आँगन...

दादी की मुस्कान...

उसने धीरे से कहा,

"यदि मैं यहाँ रह गई... तो मेरी दादी अकेली हो जाएँगी।"

रानी सेलीन मुस्कुराईं।

"यही कारण है कि तुम इस मुकुट के योग्य हो।"

"क्यों?"

"क्योंकि तुम्हारे लिए सिंहासन से बड़ा रिश्ता है।"

फिर उन्होंने अपना हाथ आसमान की ओर उठाया।

एक चमकता हुआ द्वार खुल गया।

उसके दूसरी ओर विलोमियर गाँव दिखाई दे रहा था।

मारा अपनी झोपड़ी के बाहर बैठी थीं।

उनकी आँखें नम थीं।

एलारा दौड़ती हुई उस द्वार से गुज़री।

"दादी!"

मारा ने जैसे ही उसे देखा, वे दौड़कर उसके गले लग गईं।

"मुझे पता था... मेरी बेटी ज़रूर लौटेगी।"

एलारा रोते हुए बोली,

"मैं जहाँ भी जाऊँ... मेरा पहला घर हमेशा यही रहेगा।"

उस दिन के बाद एक नया नियम बना।

हर पूर्णिमा की रात एलारा चंद्रलोक जाती और अपनी प्रजा की देखभाल करती।

हर अमावस्या के बाद वह विलोमियर लौट आती, दादी के साथ बैठकर खाना खाती, बच्चों को कहानियाँ सुनाती और गाँव वालों की मदद करती।

दोनों संसारों के बीच अब एक चमकता हुआ चाँदनी द्वार बन गया था।

किसी को भी अब डर नहीं था कि अंधेरा लौट आएगा।

कई वर्षों बाद जब बच्चे एलारा से पूछते,

"रानी जी, आपका असली घर कौन-सा है?"

वह मुस्कुराकर कहती,

"घर वह नहीं होता जहाँ आपका जन्म होता है।"

"घर वह होता है जहाँ आपको बिना किसी शर्त के प्यार मिलता है।"

मारा बरामदे में बैठी यह बात सुनतीं और मुस्कुरा देतीं।

उस रात चाँद पहले से कहीं अधिक चमक रहा था।

लोग कहते थे कि यह चंद्रलोक की नई रानी का जादू है।

लेकिन एलारा जानती थी कि वह जादू किसी मुकुट में नहीं था।

वह एक माँ के त्याग में था...

एक दादी के निस्वार्थ प्रेम में था...

सच्चे दोस्तों के विश्वास में था...

और उस दिल में था जिसने कभी प्रेम करना नहीं छोड़ा।

समाप्त

सीख: सच्चा परिवार खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनापन से बनता है।


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